भीष्म पितामह का एक अनजाना कर्म जिसने उन्हें बाणों की शैया पर कष्ट भोगने पर मजबूर कर दिया

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महाभारत

हम सभी जानते हैं और इसका एक दर्दनाक पहलू यह भी है कि बुजुर्ग भीष्म पितामह कई दिनों तक बाणों की शैया पर कष्ट भोगते रहे जब तक सूर्य शुक्ल पक्ष में नहीं आए तब तक वह अपने प्राण नहीं त्याग पाए

आखिर उन्हें इतना कष्ट क्यों हुआ

एक प्रसंग की बात है भगवान श्री कृष्ण से भीष्म पितामह पूछते हैं कि हे केशव आप तो सब कुछ जानते हैं कृपया करके मुझे बताइए कि आखिर मैंने ऐसा कौन सा पाप या अधर्म किया था जो मुझे इन तीरों की नुकीली नोंक पर अत्याधिक पीड़ा के साथ लेटे हुए अपनी मृत्यु का इंतजार करना पड़ रहा है

भगवान श्रीकृष्ण करते हैं समाधान

उनके इस प्रश्न का उत्तर देते हुए जगत के पालनहार भगवान विष्णु के स्वरूप श्रीकृष्ण भगवान उन्हें बताते हैं कि यह आपके 10 जन्म पूर्व 11वे जन्म का परिणाम है
जब आपने एक सर्प को इसी तरह से कांटो की नोक पर मरने के लिए मजबूर कर दिया था

आखिर भीष्म पितामह ने कौन सा किया था अपराध

तब आश्चर्यचकित होकर भीष्म पितामह कहते हैं प्रभु मुझे विस्तृत रूप से पूरी घटना बताने की कृपा करें

भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं

आप 10 जन्म पूर्व एक राजा थे अपने रथ से कहीं जा रहे थे

सड़क पर आपको एक सांप नजर आया आपने रथ से उतर कर उसे अपने तीर की सहायता से उठाकर सड़क के किनारे फेंक दिया और अपनी मंजिल की ओर चले गए

परंतु वह सांप एक कांटेदार पेड़ पर जाकर गिरा जिसमें वह बुरी तरह फंस गया
लाख कोशिश के बाद भी वह निकल नहीं पा रहा था
तब कई दिनों तक उन्हीं कांटों पर वह सांप तड़प तड़पकर अपनी मृत्यु का इंतजार करता रहा ऐसे में जो उसकी आह निकली उसी ने आपका पीछा यहां तक किया और उसके बदले में आपको यह कष्ट भोगना पड़ रहा है

10 जन्म पूर्व किए गए पाप का फल इतने जन्म के बाद क्यों

यह सुनकर भीष्म पितामह बड़े ही आश्चर्यचकित भाव से पूछते हैं कि हे प्रभु यदि मैंने पिछले 11वे जन्म में यह पाप किया था तो उसका परिणाम पिछले 10 जन्मों में मुझे क्यों नहीं मिला
क्यों इतने समय अंतराल जन्मों के बाद इस जन्म में मुझे इतना कष्ट क्यों भोगना पड़ रहा है

मनुष्य के अच्छे कर्म रोकते हैं बुरे परिणामों को

तब भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि
हे भीष्म पितामह पिछले 10 जन्मों में आपको इसका परिणाम इसलिए नहीं मिला क्योंकि आपने काफी अच्छे कर्म किए थे आपने धर्म का साथ दिया था आपने न्याय की बात की थी जिस कारण आपको इसका परिणाम नहीं मिला

अधर्म का साथ लेकर भोगना पड़ता है दंड

परंतु इस जन्म में आपने कौरवों का साथ दिया जबकि आप जानते हैं कि वह न्याय तथा धर्म के विरुद्ध आचरण कर रहे है
इसीलिए आप के पूर्व 11वे जन्म का पाप इस जन्म में फलीभूत हुआ

और उसी सर्प की भांति आपको अपनी मौत का इंतजार तीर की नोक पर करना पड़ रहा है

श्रीमद्भागवत गीता के उपदेश हमारे जीवन में हैं आज भी सच

इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कहा है कि कर्म का फल तो भोगना ही पड़ता है चाहे कितना ही वक्त क्यों ना गुजर जाए
जय श्री कृष्ण

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