डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय में उच्च शिक्षण संस्थाओं में शक्ति वृतांत, आख्यानों संदर्भित “बदलाव के कारक” पर हुई चर्चा

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लखनऊ : डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय लखनऊ में आयोजित “एजेंट्स ऑफ़ चेंज: शक्ति नैरेटिव्स इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस” विषयक संगोष्ठी में कुलपति प्रोफेसर सुबीर भटनागर ने शक्ति वृतांत, आख्यानों को राष्ट्र निर्माण का महत्त्वपूर्ण कारक बताया। प्रोफेसर भटनागर ने शिक्षक दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के महती भूमिका पर बात की। कार्यक्रम की समन्वयक एवं मिशन शक्ति समिति की सदस्य डॉ अलका सिंह ने फेज तीन में “बदलाव के कारक” चर्चा को महिला सशक्तीकरण की दिशा में नए शोध आयामों और अवसरों की परिपाटी कहा। डॉ अलका सिंह ने प्रकृति में निहित “शक्ति”, संगीत, राग, अनुराग आदि भावों में महिलाओं द्वारा सामाजिक संरचना और उनके योगदान को समझने की बात कही। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता भात खंडे म्यूजिक इंस्टीट्यूट डीम्ड टूबी युनिवर्सिटी , लखनऊ से प्रोफ़ेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ सृष्टि माथुर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में संगीत का विशिष्ट महत्व है। नारी शक्ति एवं संगीत का आमेलन प्रत्येक काल में समाज को नई दिशा प्रदान करते रहे है।


संगीत एक प्रभावशाली थेरेपी/चिकित्सा के रुप में माना जाता है जो मनोवैज्ञानिक रूप में हमें मज़बूत बनाती है।ये शारीरिक एवं मानसिक बदलाव का भी सशक्त कारक है।प्रायः देखा गया है कि इस क्षेत्र में जिन महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है वह शारीरिक व मनोवैज्ञानिक रूप से भी सशक्त रही हैं। आज महिलाएं संगीत को भी रोज़गार के रूप में अपना रही हैं ऐसा विभिन्न स्तरों पर हो रही प्रतियोगिताओं के माध्यम से देखा जा रहा है। जो महिलाएं इसको पूर्णकालिक कार्य के रूप में अपनाना चाहती हैं वे उच्च शिक्षण संस्थानों में इसके शास्त्र व प्रयोग पक्ष को सीखकर विभिन्न रोज़गार प्राप्त करती हैं।

डॉ अलका सिंह, शिक्षक, लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय लखनऊ, एवं कार्यक्रम की समन्वयक, ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारत की गौरवशाली संस्कृति में नारी शक्ति के समीकरण को समझने, समझाने के अनेकानेक प्रयास किए गए हैं। नारी शक्ति का एक व्यापक दृष्टिकोण हमारी संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक संरचनाओं का एक अहम हिस्सा है, जिसको राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२० में निहित अंतरविषयी शोध सूत्र में बंधे मानविकी विभागों द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों की भूमिका के प्रयोगों द्वारा नई दिशा प्रदान की जा सकती है। उच्च शिक्षण संस्थानों के मानविकी विभागों में निहित “शक्ति” को समझने के प्रयास करने होंगे।


संगोष्ठी में डॉ कुलवंत सिंह, डॉ सुमेधा द्विवेदी, डॉ निलॉय मुखर्जी, श्री मिलिंद राज आनंद, सुश्री भव्या अरोड़ा, सुश्री अनुकृति राज, बिहार से सुश्री पूजा झा, श्री राहुल कुमार , तजाकिस्तान नजरोह खयोम, हसनोविच, इंडोनेशिया से आंद्रे मौलाना समेत विश्व विद्यालय परिवार के अन्य शिक्षकों, छात्रों, समेत देश , विदेश से कई शिक्षाविद , शोधार्थी आदि ने प्रतिभाग किया।

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