एल॰पी॰सी॰पी॰एस॰ में “विमेन एंपावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप” विषयक इंटरनेशनल कान्फ्रेंस

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लखनऊ : गोमती नगर स्थित लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में ‘महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विकास’ अथवा “विमेन एंपावरमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप” विषय पर एक दिवसीय इंटरनेशनल कान्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस समय भारत में रह रहे इंडोनेशिया के ईएल टी के असिस्टेंट प्रोफेसर एवम रिसर्चर अक्सेंद्रो मेक्सीमिलियन, यमन में शिक्षक एवम् भारत में रिसर्च उद्देश्य से आए अब्दुलअज़ीज़ अहमद , रूस की एलेना स्टोयाकिना, डॉ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की अंग्रेजी विभाग की शिक्षक डॉ. अलका सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वीसी डॉ. ऐ के सेनगुप्ता, शिक्षाविद डॉ. एसपी सिंह, एल पी एस डायरेक्टर सुश्रीनेहा सिंह, सुश्रीगरिमा सिंह, श्री हर्षित सिंह, एल पी सी पी एस के डीन डॉ. एल एस अवस्थी, डॉ. एम एल गुप्ता व डॉ. मानव सिंह ने महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विकास पर अपने विचार व्यक्त किये |

इसके अतिरिक्त मुंबई के सेन्ट जेबियर कॉलेज से डॉ. अवकाश जाधव व नाइजीरिया से डॉ. अफ्यौर ओ. एम. आइतो ने ऑनलाइन माध्यम से भी विषेश व्याख्यान दिया|

कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्य वक्ता डॉ अलका सिंह, शिक्षक राष्ट्रीय विधि विश्व विद्यालय, लखनऊ ने अपने कीनोट एड्रेस में विमेन एंपावरमेंट के साहितिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं महिला डिजिटल स्किल्स के पक्षों पर चर्चा की। उन्होंने देश के महिला मुद्दों से संबंधित मजबूत कानूनों पर चर्चा करते हुए कहा की ये किसी भी बालिका अथवा महिला सशक्तिकरण की दिशा में सम्यक प्रयास है। महत्वपूर्ण शास्त्र एवं शस्त्र हैं। उन्होंने वर्जीनिया वुल्फ की पुस्तक “अ रूम ऑफ़ वंश ओन”, “थ्री गिनियाज”,” प्रोफेशनस फॉर वूमेन”, तोरिल मोया एवम केट मिलेट द्वारा लिखीं चार्चित पुस्तकों “सेक्सचुअल टेक्सचुअल पॉलिटिक्स”, “द सेकंड सेक्स” समेत भारतीय लेखकों द्वारा रचित महिला सशक्तिकरण के परिपेक्ष्य में अन्यारचनाओं पर भी चर्चा की।

महिलाओं के माहवारी चक्र समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधित एवम बालिका और महिला सुरक्षा के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति पहल को सराहनीय कदम बताया। आर्थिक परिपेक्ष्य में नीति आयोग, सिडबी, वेवा, एसी आव, विमेन यूनिवर्सिटी और “एंटरप्रेन्योर ” को परभाषित किया। शिक्षा संवाद के महत्व पर अन्य सभी वक्ताओं ने भी विषेश मंत्रणा और विवेचना की।कॉन्फ्रेंस में इस बात कि पुष्टि की गयी कि महिलाएं समाज की वास्तविक सामर्थ्य इकाई हैं | सामाजिक विकास में उनकी बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिये | महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विकास एक प्रगतिशील समाज की आवश्यकता है |

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