मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी : डॉ. जयनाथ

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कौशाम्बी : कोविड-19 के चलते वर्तमान में हर किसी के सामने तमाम दिक्कतें और चुनौतियाँ हैं| हमारी सामान्य से चलने वाली जिंदगी में अचानक से ठहराव सा आ गया है | सामान्य गतिविधियां भी असामान्य गतिविधियों की श्रेणी में आने लगी हैं | साथ ही हमने नॉर्मल से न्यू नॉर्मल की तरफ जाते हुए, यह सीख ली है कि * दो गज दूरी, मास्क है जरूरी|

जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम कौशांबी के मनोचिकित्सक व परामर्शदाता डॉ जयनाथ बीपी का कहना है कि प्रतिदिन मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन में 15 से 20 लोगों की इस तरह की परेशानियों से रूबरू होते हैंl लोगों की शिकायत नींद की कमी, घबराहट चिंता, बेचैनी, अकारण उलझन आदि समस्याएं देखी गई हैंl

उन्होंने बताया कि मनोचिकित्सीय विश्लेषण पर पता लगता है कि वर्तमान में कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण जो स्थिति है उससे लोग अब भी सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं और मानसिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं l इस परिस्थिति से उबरने के लिए मरीजों को सिर्फ हेल्पलाइन नंबर पर परामर्श ही नहीं बल्कि कोविड-19 के दौरान भर्ती हुए कोविड-19 मरीजों को तनाव प्रबंधन, सकारात्मक मनोवृति और सोच, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी आदि तकनीकों द्वारा मानसिक रूप से स्वस्थ रखने की हिदायत और सुझाव दिए जाते हैं| मानसिक स्वास्थ संबंधी एंजाइटी, पैनिक डिसऑर्डर, डिप्रेशन, डिसोसिएटिव एपिसोड, ओसीडी आदि के कैस इस दौरान काफी देखने को मिले हैंl

कोरोना ने न सिर्फ शारीरिक आयामों में परेशानियां लाई है बल्कि बहुत हद तक मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है| जो लोग पहले मानसिक परेशानियों के बारे में बात करना, उसके इलाज के लिए मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक को दिखाना और यह स्वीकारना कि उन्हें कोई मानसिक परेशानी है, से कोसों दूर थे वह इस महामारी के दौर में अब छोटी-मोटी मनोवैज्ञानिक परेशानियों को समझते हैं, उसे पहचानते हैं और उसके इलाज के लिए के लिए आगे आ रहे हैं| इस परिस्थिति में न सिर्फ पुरानी मानसिक परेशानियों को और बढ़ाया है बल्कि कुछ नई मानसिक परेशानियां जैसे साइबरकांड्रिया, एक्यूट स्ट्रेस रिएक्शन, स्क्रीन डिपेंडेंसी आदि के बारे में हमें परिचित करवाया है|

कोरोना वायरस के स्ट्रेस से बचने के लिए क्या करना चाहिए-
ऐसे में स्ट्रेस से बचने के लिए “स्टे एट होम क्लब” ज्वाइन करना चाहिए। अपने समय का रचनात्मक उपयोग करें। अपने शौक को समय दें। जैसे- पेंटिंग, लेखन, खाना बनाना, गेम्स खेलना, किताब पढ़ना आदि। कुछ नया सीखने की कोशिश करें। ऑनलाइन स्टडी वाले कोर्स, संगीत आदि।

नकारात्मक, चिंता उत्पन्न करने वाली सोच पर ध्यान न दें। खुद को व्यस्त रखें। पैनिक से पीस की ओर अग्रसर हो। मन और शरीर के गहरे रिश्ते को समझते हुये मन और शरीर को शांत और संतुलित व सक्रिय रखे। जैसे- शारीरिक व्यायाम, ब्रीदिंग, एक्सरसाइज, योगा, मेडिटेशन आदि।

भावनात्मक स्तर पर मजबूत और नियंत्रित रहें। अपनो से वीडियो कॉलिंग, ऑडियो कॉलिंग आदि से जुड़े रहे व मन की बातों को शेयर करते रहें। सोच भावनाएं व व्यवहार में असामान्य परिवर्तन पर अपने नज़दीकी जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक से परामर्श लें

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