हाइड्रोसिल भी फाईलेरिया का लक्षण

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प्रयागराज: जनपद प्रयागराज में फाईलेरिया उन्मूलन अभियान के अन्तर्गत आई.डी.ए 2021 कार्यक्रम का संचालन दिनांक 12 जुलाई से 26 जुलाई 2021 तक किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभाकर राय ने बताया कि फाईलेरिया एक घातक बीमारी हैं ये सलेंट रहकर शरीर को ख़राब करती हैं जिसकी जानकारी समय पर लगभग नहीं हो पाती हैं | इस बीमारी को ख़तम करने के लिए हमें हर बार अभियान में दवा का सेवन पूरे परिवार के साथ जरुर करना चाहियें |


आनन्द कुमार सिंह जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जनपद की कुल जनसख्यां 68,16,207 है तथा लक्षित जनसंख्या 57,93,446 है जिन्हे आई.डी.ए -2021 कार्यक्रम के तहत तीन दवाओं (अल्बेन्डाजोल, डी.ई.सी, आइवरमैक्टिन) का सेवन टीमों के माध्यम से ड्रग एडमिनिस्टैटर्स (आशा, आंगनबाड़ी, एन.जी.ओ सदस्य) द्वारा कराया जाना है। जनपद के ग्रामीण व नगरीय लक्षित जनसंख्या को ड्रग एडमिनिस्टैटर्स द्वारा 4,635 टीमों के माध्यम से दवाओं का सेवन खुराक के अनुसार कराया जाना है। नगरीय क्षेत्र/ब्लाक स्तर पर आई.डी.ए-2021 कार्यक्रम में लगी टीमों का पर्वेक्षण करने हेतु 773 सुपरवाइजर लगाये गये है। नगरीय क्षेत्र/ब्लाक स्तर पर टीमों का सुपरविजन ए.एन.एम, बी.एच.डब्ल्यू, हेल्थ सुपरवाइजर के माध्यम से किया जा रहा है। जनपद स्तर से मानिटर के तौर पर टीमों एवं कार्य में लगे सुपरवाइजरों का डब्ल्यू.एच.ओ, पाथ, पी.सी.आई, एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर रहें है।

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक टीम एक दिन में 17 घरों का भ्रमण कर दस्तक अभियान के साथ एवं कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए लाभार्थियों को तीनों दवाओं का सेवन अपने समक्ष उम्र व ऊचाई के अनुसार करा रहीं हैं। हरि शंकर सहायक जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जनपद में कार्यरत 4,635 टीमों ने दिनांक 16 जुलाई 2021 तक 16,81,921 लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया। जिसमें अल्बेन्डाजोल की 16,81,921 गोलियां, डी.ई.सी की 41,53,800 गोलियां, आइवरमैक्टिन की 44,32,455 गोलियां लाभार्थियों को सेवन करायी गयी हैं ।

लक्षण: आमतौर पर फाईलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाईलेरिया के लक्षण हैं। चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। वैसे तो फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन कई सालों तक इसके लक्षण नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

फाईलेरिया से बचाव
• फाईलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें
• पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।
• सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें
• हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें

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