“लाखन के चित्रों में स्मृतियों के साथ यथार्थ का भी प्रभाव”

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एनवी न्यूज़डेस्क/लखनऊ

अस्थाना आर्ट फ़ोरम के ऑनलाइन मंच पर ओपन स्पसेस आर्ट टॉक एंड स्टूडिओं विज़िट के 20वें एपिसोड का लाइव आयोजन रविवार किया गया। इस एपिसोड में आमंत्रित कलाकार के रूप में जयपुर राजस्थान के युवा चित्रकार लाखन सिंह जाट रहे। इनके साथ बातचीत के लिए जयपुर से ही चित्रकार अमित हरित रहे और इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में देश के जाने माने वरिष्ठ चित्रकार श्री विद्यासागर उपाध्याय भी जयपुर से शामिल हुए। कार्यक्रम ज़ूम मीटिंग द्वारा लाइव किया गया।


कार्यक्रम के संयोजक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि लाखन सिंह जाट राजस्थान जयपुर के युवा चित्रकार हैं। इनका जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ। इन्होंने अपनी कला की शिक्षा दीक्षा राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट जयपुर से 2009 में पूरा किया। उसके बाद से एक स्वतंत्र चित्रकार के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। लाखन को 2011 में राज्य पुरस्कार ललित कला अकादमी राजस्थान से साथ ही कुछ विशेष सम्मान भी प्राप्त है। लाखन के चित्रों की एकल एवं सामूहिक प्रदर्शनी भी देश के कई हिस्सों में लगाई जा चुकी हैं। और कई कला शिविरों में भी भागीदारी सुनिश्चित कर चुके हैं। लाखन के चित्रों की यदि बात करें तो इनके चित्रों में राजस्थान की एक सुंदर झलक मिलती है। एक ग्रामीण जीवन और को विशेष महत्व देते हैं।

लाखन देश के युवा चित्रकारों में अपनी विशेष पहचान रखने वाले जयपुर के चित्रकार लाखन सिंह जाट अपनी कला में रूपाकारों और रंगों के ऐसे प्रयोग कर रहे हैं जो अभूतपूर्व नए अहसास हमें कराते हैं। बातचीत में उनके कला गुरु रहे भारत के वरिष्ठ कलाकार श्री विद्यासागर उपाध्याय जी ने लखन के काम की सराहना करते हुए उनके सृजन के अंदाज की प्रशंसा की। छोटे से गांव से जयपुर शहर आये चित्रकार लाखन किस तरह अपने रचना संसार मे अपने बचपन और गांव से जुड़े हुये हैं यह कितना महत्वपूर्ण है एक कलाकार का अपनी जड़ों से जुड़ा होना यह बातचीत में श्री विद्यासागर जी ने कही। उपाध्याय ने आगे कहा कि एक अच्छी कला का जन्म कलाकार के अच्छी सोच, दृष्टि और अच्छे विचारों के साथ होती है यही कला की सार्थकता भी है।

लाखन सिंह जाट से बात करते हुए अमित हारित ने उनसे उनके रचना कर्म में उनके जीवन के प्रभाव,उनकी स्मृतियों के प्रभाव का जिक्र करते हुये चित्र बनाने की प्रक्रिया और उनके रंगों तथा रूपाकारों को लेकर काफी गहराई तक बात की। लाखन ने बताया कि किस तरह वे आज भी आने गांव और वहां के जीवन को अंदर तक महसूस करते हैं। वहां की आबो हवा, वहाँ की मिट्टी किस तरह से उनके चित्रों के रंगों पर अपना प्रभाव डालती है। लाखन ने अपने चित्रों में बयान कहानियों के किस्से भी सुनाये और किस तरह वे आज अपनी कलायात्रा में इस पड़ाव तक पहुंचे है वह हमसे साझा किया।
लाखन के चित्रों में स्मृतियों की गहराई के साथ आज की वर्तमान परिस्थितियो और घटनाओं की छाप भी दिखाई देती है। लाखन के चित्रों का अबोधपन उनके विचारों में भी झलकता है जो कि बातचीत में सामने आया। लाखन ने कोरोना महामारी के दौरान भी अनेक कलाकृतियों की रचना की जिसमे उस समय की वास्तविक स्थिति को बयां करती है। कार्यक्रम के दौरान लाखन के चित्रों को प्रेजेंटेशन के माध्यम से लोगों ने देखा और अपने अपने प्रश्न भी रखे जिसका उत्तर लाखन ने बड़े ही सरलतापूर्वक दी।

लाखन के चित्रों में उनके बचपन की स्मृतियों के साथ साथ ग्रामीण परिवेश और लोक जीवन की झलक मिलती है। उनके चित्रों में प्रमुखता से बचपन मे बच्चों के खेल, ग्रामीण रहन सहन, पशुपक्षी, जीव जंतु और लगातार परिवर्तित होती हुई प्रकृति को भी प्रतीकात्मक रूप से देखने को मिलती हैं। लाखन ने कहा कि कलाकार की दृष्टि बड़ी की पैनिक होती है। वह बड़ी ही बारीकियों से हर चीज़ को देखता है और अपने विचारों में उसे कैनवास पर प्रस्तुत करता है। यदि सबकुछ बातों को समेटते हुए कहें तो लाखन के प्रकृति से ख़ास संबंध को दर्शाता है।

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